दिल्ली लॉकडाउन ढील के पहले दिन 500 नए केस

राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस लॉकडाउन में ढील के पहले ही दिन चिंता बढ़ानेवाली खबर आई है। राजधानी दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 500 नए केस देखने को मिले हैं। यह अबतक का सबसे बड़ा उछाल बताया जा रहा है। दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 500 नए केस मिले। अबतक कोरोना के कुल केसों की संख्या 10554 हो चुकी है। इसमें से 5638 ऐक्टिव हैं और 166 लोग कोरोना की वजह से जान गंवा चुके हैं।

दिल्ली में लॉकडाउन खोलने में जल्दबाजी दिखाई गई है, इसपर बात करते हुए केजरीवाल ने कहा था कि फिलहाल कोरोना के साथ ही जीना सीखना होगा क्योंकि इसका इलाज निकट भविष्य में नहीं दिख रहा। उन्होंने कहा था कि दिल्ली को धीरे-धीरे ही खोला जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मेट्रो, मॉल, हॉल फिलहाल बंद ही हैं।

दिल्ली में अभी तक 1,45,854 टेस्ट किए जा चुके हैं। दिल्ली सरकार उन सभी इलाकों को हॉटस्पॉट मानकर सील किया है जहां कोरोना के 3 से अधिक मामले एक साथ पाए गए हैं। दिल्ली में अब कुल 70 कोरोना कंटेनमेंट जोन है। इन इलाकों को दिल्ली सरकार ने दिल्ली पुलिस की मदद से पूरी तरह सील कर दिया है। किसी भी कोरोना कंटेनमेंट जोन या कोरोना हॉटस्पॉट में बाहर का कोई व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। इसी तरह इन कंटेनमेंट जोन में रह रहे लोग भी इस इलाके से बाहर नहीं आ सकते। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कोरोना का संक्रमण इन क्षेत्रों से निकलकर अन्य इलाकों में न फैल सके।

अप्रैल में 3515 मरीज थे, मई में संक्रमण तेज

दिल्ली में अप्रैल के मुकाबले मई महीने में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राजधानी में कोरोना मरीजों की संख्या 10 हजार के पार हो गई है। एक विशेषज्ञ का दावा है कि जून-जुलाई में कोरोना वायरस अपने पीक पर होगा, यानी उस दौरान सबसे ज्यादा मरीज सामने आने और वायरस के खतरनाक होने की संभावना जताई जा रही है। इस आकलन बताता है कि आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

2 मार्च को आया था पहला केस

राजधानी में 2 मार्च को कोरोना का पहला मामला सामने आया था। धीरे-धीरे यह मामला बढ़ता गया और 31 मार्च तक दिल्ली में कोविड मरीजों की संख्या 120 तक पहुंच गई। मार्च में संक्रमण की रफ्तार बहुत कम देखी गई। डॉक्टरों का कहना है कि मार्च में वायरस का प्रमुख स्रोत विदेश से आए लोग ही थे। उस समय तक आम लोगों में संक्रमण ना के बराबर पहुंचा था। वायरस उन्हीं लोगों में पाया जा रहा था, जो विदेश से आए थे या उनके संपर्क में थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता गया, संक्रमण की रफ्तार बढ़ती चली गई और मार्च के अंत तक निजामुद्दीन इलाके में संक्रमण का बड़ा हॉट स्पॉट बना, उसके बाद अप्रैल में अचानक दिल्ली में संक्रमण की रफ्तार बढ़ गई।

31 मार्च को दिल्ली में मरीजों की संख्या 120 थी, जो अगले पांच दिनों में 500 के पार पहुंच गई। इसकी वजह निजामुद्दीन इलाके का हॉट स्पॉट था। इसके बाद अप्रैल में हर पांच दिन में मरीजों की संख्या चार से पांच सौ तक बढ़ने लगी। 20 अप्रैल तक यह संख्या 2 हजार के पार पहुंच गई और अप्रैल अंत में दिल्ली में 3515 पॉजिटिव मरीज हो गए।