धनलक्ष्मी बैंक को पटरी पर लाने के लिये रिजर्व बैंक को तत्काल कदम उठाने की जरूरत: एआईबीओसी

नई दिल्ली। बैंक अधिकारियों के संगठन एआईबीओसी ने मंगलवार को कहा कि धनलक्षमी बैंक में हुई कुछ गतिविधियों को देखते हुए रिजर्व बैंक की तरफ से उसमें सुधार को लेकर तत्काल कदम उठाये जाने की जरूरत है। संगठन ने नियामक से बैंक को बचाने के लिये उपयुक्त कदम उठाने का आग्रह किया है।

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कान्फेडरेशन (एआईबीओसी) ने रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास को लिखे पत्र में कहा कि बैंक उद्योग में यह ज्ञात तथ्य है कि गलत प्राथमिकताओं और निगरानी में ढिलाई से एक दशक पहले धनलक्ष्मी बैंक को काफी नुकसान पहुंचा था।

यह पत्र ऐसे समय आया है जब कुछ ही दिन पहले कर्ज में फंसी लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरधारकों ने सात निदेशकों को बर्खास्त कर दिया। बैंक को आरबीआई ने सितंबर 2019 में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) रूपरेखा के अंतर्गत रखा था।

पत्र में कहा गया है कि 92 साल पुराना निजी क्षेत्र का धनलक्ष्मी बैंक खासकर देश के दक्षिणी भाग में आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उसने आजादी से पहले से अलग तरीके की बैंक सेवा को लेकर एक पहचान बनायी। संगठन ने कहा, ‘‘इन सबको देखते हुए हम कुछ क्षेत्रों की ओर आपका ध्यान दिलाना चाहते हैं जिस पर आपको बैंक, लाखों ग्राहकों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित पक्षों के हित में उनके निपटान के लिये तुंरत ध्यान देने की जरूरत है।’’ वित्तीय स्थिति खराब होने के कारण धनलक्ष्मी बैंक को पीसीए रूपरेखा के अंतर्गत नवंबर 2015 में रखा गया। पिछले साल ही बैंक पर कुछ पाबंदियों को लेकर ढील दी गयी थी।

उसके बाद बैंक को तिमाही लाभ भी हुआ। पत्र में मसलों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि धनलक्ष्मी बैंक को 2008-09 की तीसरी तिमाही से 2010-11 की चौथी तिमाही तक अगली पीढ़ी के प्रयोग के लिये मजबूर किया गया। इससे बैंक की परिचालन लागत बढ़ी और अविवेकपूर्ण तरीके से कर्ज दिये गये। संगठन ने कहा, ‘‘जब चीजें बदलती हुई दिख रही थी, दुर्भाग्य से हमें पता चलता है कि नीतियों में बदलाव हो रहा है और प्रयोग के वर्षों में जो चीजें हुई थी, उसे वापस लया जा रहा है।’’ एआईबीओसी ने आरोप लगाया कि बिक्री टीम को जो लक्ष्य दिये गये, वह शाखा के लक्ष्य से अलग थे। इससे कर्मचारियों के बीच अनचाही प्रतिस्पर्धा शुरू हुई, जिसकी कोई जरूरत नहीं थी। इसका असर बैंक पर पड़ा। पिछले सप्ताह, एक अन्य बैंक संगठन एआईबीईए ने आरबीआई के गवर्नर से धनलक्ष्मी बैंक के मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया था। संगठन का कहना था कि बैंक गलत दिशा में बढ़ रहा है। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयज एसोसएिशन (एआईबीईए) ने आरबीआई गवर्नर को लिखे पत्र में दावा किया कि बैंक कारोबार प्रोफाइल को बदलने पर विचार कर रहा है। बैंक उत्तरी भारत में नेटवर्क बढ़ाना चाहता है और अनुबंध आधार उच्च वेतन पर वरिष्ठ लोगों को नियुक्त कर रहा है जिससे बैंक समस्या में फंस सकता है। यूनियन ने गवर्नर से इस संदर्भ में उपयुक्त कदम उठाने का आग्रह किया ताकि करीब सौ साल पुराना संस्थान अपने क्षेत्र में आगे बढ़ सके और लोगों की जरूरतों को पूरा कर सके। नेशनल आर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्ल्यू) के पूर्व उपाध्यक्ष अश्विनी राणा ने लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) के संदर्भ में कहा कि पंजाब एंड महाराष्ट्र कोअपरेटिव बैंक और यस बैंक में संचालन स्तर पर विफलता के बाद एलवीबी भी उसी दिशा में जा रहा है। राणा ने कहा कि धनलक्ष्मी बैंक समेत कुछ अन्य निजी बैंकों के समक्ष भी यही समस्या है। इस प्रकार की घटनाओं के साथ जमाकर्ताओं का इन निजी बैंकों पर से भरोसा उठ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘संचालन स्तर पर विफलता और जमाकर्ताओं के हितों के संरक्षण के लिये सरकार को इन निजी बैंकों का विलय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ कर देना चाहिए और इस कठिन समय में देश और लोगों के हित में पीएसयू बैंकों के निजीकरण से बचना चाहिए।