पीसीसी से हटे सचिन पायलट के पोस्टर, जानिए कौन बन सकते हैं नए पीसीसी चीफ

प्रदेश में गहलोत सरकार पर बड़े सियासी संकट के बीच राजस्थान कांग्रेस कमेटी के नये अध्यक्ष के नाम को लेकर भी कयास तेज है। जहां समवार सुबह सचिन पायलट के पोस्टर पीसीसी से हटाए गए हैं। वहीं सूत्रों से यह भी जानकारी के अनुसार नए पीसीसी चीफ को लेकर लगभग अंतिम निर्णय ले लिया गया है। पीसीसी चीफ के तौर पर सबसे ज्यादा नाम सीडब्लूसी सदस्य रघुवीर मीणा का आ रहा है, जो पूर्व में उदयपुर से सांसद भी रह चुके है। मीणा के सीएम अशोक गहलोत से करीबी संबध माने जाते है, ऐसे में एक धड़ा रघु को ‘वीर’ बताते हुए उनके नाम को उपयुक्त मानकर आगे बढ़ा रहा है। हालांकि लालचंद कटारिया, महेश जोशी और हरीश चौधरी भी संगठन के इस प्रमुख पद की दौड़ में माने जा रहे है।

जानिए मीणा के बारे में

पीसीसी चीफ की दौड़ में सबसे आगे रहे रघुवीर मीणा उदयपुर जिले की सराड़ा और बाद में सलूम्बर विधानसभा सीट से 4 बार विधायक रहे है। मीणा 1 बार मंत्री और 2009 में एक बार सांसद भी रह चुके है। 2014 और 2019 में उदयपुर लोकसभा से लगातार अपने ममेरे भाई अर्जुन मीणा(बीजेपी से निवर्तमान सांसद) से चुनाव हार चुके है। उदयपुर लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। खास बात है कि लगातार दो बार लोकसभा चुनाव(2014, 2019) और बार विधानसभा चुनाव (2018) हारने के बावजूद रघुवीर मीणा अखिल भारतीय कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य है।

ये है मीणा की परिवारिक पृष्ठभूमि

61 वर्षीय सीडब्लूसी मेम्बर रघुवीर मीणा अपने गांव के सरपंच से लेकर लोकसभा तक का सफर कर चुके है। रघुवीर मीणा के पिता देवेंद्र मीणा भी कांग्रेस से विधायक रह चुके है। उनकी मां बंसती देवी मीणा भी विधायक रह चुकी है। बसंती मीना ने 2009 में उपचुनाव जीत कर विधानसभा पहुंची थी। शैक्षणिक योग्यता की बात करें, तो मीणा ने वर्धमान महावीर विश्वविद्यालय से लॉ में ग्रेजुएशन किया है।

जातीय समीकऱण और अनुभव है कारण

रघुवीर मीणा के प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में आगे होने का बड़ा कारण एक बड़ी वजह जातीय समीकरण को साधना भी है। अनुसूचित जनजाति वर्ग (एसटी) से आने वाले रघुवीर कांग्रेस की राष्ट्रीय वर्किंग कमेटी के चयनित 51 सदस्यों में भी एक है। लंबे समय तक अशोक गहलोत से करीबी सम्बन्धो के चलते विधायक -सांसद नही होने पर राजनीतिक तौर पर राजीनीतिक नियुक्ति के तौर पर भी माना जा रहा है। हालांकि यूथ कांग्रेस से लेकर संगठन में भी रघुवीर मीणा का लंबा अनुभव माना जाता है।

मेवाड़ में सर्वमान्य नही, फिर भी सत्ता-संगठन में बराबर दखल!

रघुवीर मीणा को कांग्रेस में सर्वमान्य नेता नही माना जाता है। इन्ही के समुदाय से आने वाले वागड़ के महेंद्रजीत सिंह मालवीय(बागीदौरा विधायक) और डॉ दयाराम परमार (खेरवाड़ा विधायक) से दो प्रमुख कांग्रेसी नेताओं से इनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वता मानी जाती है। यही नही मंत्रिमंडल विस्तार के वक्त भी मेवाड़-वागड़ से मंत्री के चयन में मालवीय और परमार को नहीं लिए जाने के पीछे मीणा को कारण माना जाता है। यहां तक कि रघुवीर के करीबी मित्र अर्जुनलाल बामणिया को मंत्री बनाये जाने के पीछे भी रघुवीर मीना की राजनीतिक लॉबिंग को माना गया।

मेवाड में तीन गुट

जानकारी के अनुसार जहां वर्तमान में मेवाड़ में तीन गुटों में अघोषित तौर पर विभाजित सीपी, गिरिजा और रघु गुट माना जाता है। साथ ही जहां विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ गिरिजा व्यास से जुड़े कांग्रेसी पदाधिकारियों की ओर से रघुवीर मीणा को पसंद नही किया जाता है। पिछले 8 दिनों रघुवीर मीणा राजधानी जयपुर में डेरा डाले बैठे है। रघुवीर का सत्ता के साथ ही संगठन में भी सीडब्लूसी सदस्य होने के नाते भी पूरी दखलअंदाजी मानी जाती है। अलग अलग वक्त में उनके चुनाव सिर्फ सीएम अशोक गहलोत ही नही, राहुल गांधी सहित कई कांग्रेसी फायर ब्रांड नेता भी प्रचार करने आते रहे है, लिहाजा अब उन्हें पूर्व के मेहनत का परिणाम मिल सकता है।