राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बेटे शौर्य डोभाल के चीन दौरे पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र की मोदी सरकार को घेरने में लगी है। इस क्रम में कांग्रेस ने अब सरकार से पूछा है कि आखिर किस हैसियत से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बेटे शौर्य डोभाल चीन का दौरा कर रहे हैं। साथ ही भारत-चीन के बीच बातचीत को लेकर इंडिया फाउंडेशन क्यों मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है। वो किससे मिलते हैं और उसके क्या परिणाम रहे हैं? ये सभी महत्वपूर्ण प्रश्न हैं, जिनके जवाब सामने आने चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के सामने सीमा पर गंभीर चुनौती है लेकिन चुनौती के वक्त में भी सरकार विपक्ष और विशेषज्ञों को लाल आंख दिखा रही है। यह वक्त देश के लोगों से सच छिपाने के लिए आंखें लाल करने का नहीं बल्कि चीन को कड़ा जवाब देने का है। जो लगातार वार्ता में सहमति जताने के बाद प्रतिदिन नये दावे कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब तो भाजपा के लद्दाख के नेता भी कह रहे हैं कि चीन काफी अंदर तक घुस गया है, दूसरी ओर अरुणाचल प्रदेश से भी गंभीर खबर आ रही है।

इस दौरान पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और भाजपा के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिनिधिमंडल चीन भेजा, इससे देश को क्या फायदा हुआ? और अगर संबंध मजबूत हुए हैं तो फिर सीमाएं असुरक्षित क्यों हैं? ऐसे और भी सवाल हैं कि इंडिया फाउंडेशन इन देशों का दौरा क्यों करता है? वे किससे मिलते हैं? इसके परिणाम क्या हैं? एनएसए अजीत डोभाल के बेटे शौर्य डोभाल की इसमें भूमिका क्या है? वह इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से इन बैठकों में क्यों भाग लेते रहते हैं? ये सभी प्रश्न महत्वपूर्ण हैं और इनके जवाब सामने आने चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी भी सरकार के सामने दो विकल्प होते हैं या तो वो पूरे देश को साथ लेकर चले या सेना के पीछे खड़े होकर चीन का मुकाबला करे या शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर दबाकर कहे कि कुछ हुआ ही नहीं, एलएसी पर कोई घुसपैठ नहीं हुई। लेकिन अफसोस की बात है कि मोदी सरकार ने तीसरा रास्ता चुना। प्रधानमंत्री मोदी ने सेवानिवृत सेना अधिकारियों, सुरक्षा विशेषज्ञ और मीडिया कर्मियों की चेतावनी को दरनिकार करते हुए चीन को यह कहकर क्लीन चिट दे दी कि उन्होंने हमारे क्षेत्र में घुसपैठ नहीं की।

अब स्थिति यह है कि चीन दुनिया भर में पीएम मोदी की टिप्पणी का उपयोग यह कहते हुए कर रहा है कि देखो भारतीय पीएम कहते हैं कि चीन अपने क्षेत्र में है और गलवान हमारा अपना क्षेत्र है। बहुत दबाव के बाद पीएमओ ने प्रधानमंत्री के बयान का खंडन तो किया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है। पवन खेड़ा ने कहा कि यह भी अपने आप में पहली बार हुआ जब प्रधानमंत्री कार्यालय ही प्रधानमंत्री के बयान का खंडन कर रहा है। जब भारत और चीन के बीच 1962 में युद्ध हुआ था, तब अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने संसद का विशेष सत्र बुलाया था लेकिन आज न तो संसद का सत्र बुलाया जा रहा है, न ही विपक्ष की बात सुनी जा रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आज संसदीय कमेटी की बैठक भी नहीं हो रही है। मोदी सरकार लगातार सच को छिपाने में लगी है फिर चाहे वो रोजगार का मसला हो, विकास की बातें हो या फिर आज चीन को लेकर जारी विवाद ही क्यों ना हो।