ठंड, बारिश में डटे रहे किसान, कहा- आग बरसे तो भी नहीं जाएंगे

नई दिल्ली (hdnlive)। हाड़ कंपा देने वाली सर्द हवा और बारिश के बीच भी रविवार को किसान सिंघु बॉर्डर पर डटे हुए हैं। बारिश के कारण किसानों (farmer bill) की मुश्किलें बढ़ी हैं लेकिन उनका हौसला बुलंद है। किसानों का कहना है कि सर्दी, बारिश ही नहीं आग भी बरसे तब भी मांगें माने जाने तक यहां से नहीं जाएंगे। काले कानून के कारण हमारी खेती और जिंदगी प्रभावित हो रही है। आने वाले समय में यदि यह कानून इसी तरह रहा तो हमारी मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

सिंघु बॉर्डर सीमा पर जलभराव से मुश्किलें बढ़ गई हैं। बारिश के कारण कीचड़ से सनी सड़कें और जगह-जगह लगे पानी के कारण आंदोलन स्थल पर जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को सुबह से हो रही बारिश के बाद दोपहर में थोड़ी स्थिति सामान्य हुई तो बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ सिंघु बॉर्डर पहुंचने लगे। किसानों के रिश्तेदार भी बच्चों और महिलाओं के साथ बॉर्डर पर पहुंचे हुए हैं।

अमृतसर से आई कंवलजीत कौर ने बताया कि मेरे भाई किसान आंदोलन में लंबे समय से यहां रह रहे हैं इसलिए मैं उनसे अपनी बेटी के साथ मिलने आई हूं। उनका परिवार कनाडा में भी रहता है। मैंने बेटी को बताया कि यह आंदोलन क्यों जरूरी है।

प्रीतम सिंह जालंधर से यहां आए हैं। उनके साथ उनके बच्चे सनी और रिंकू भी आंदोलन में पहुंचे हुए हैं। प्रीतम ने बताया कि घर पर सारी सुविधाओं के बीच ये बच्चे रहते हैं लेकिन मैं इनको आंदोलन में इसलिए लाया हूं ताकि इन्हें महसूस हो सके कि जो अन्न हम खाते हैं उसे उगाने वाले किसान अपने हक के लिए आज किस स्थिति में हैं। यहां कई लोगों की ट्राली पर बनी झोपड़ी बारिश के चलते खराब हो गई है। कई लोगों के बिस्तर भीग गए हैं लेकिन लोग अपने हौसलों के साथ यहां टिके हुए हैं।

सिंघु बॉर्डर पर रविवार को मैट बिछाकर कबड्डी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें कई टीमों ने हिस्सा लिया। इस आंदोलन का हिस्सा बने हजारो लोगों ने यह प्रतियोगिता देखी। प्रतियोगिता के बाद विजयी टीम को बैज देकर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा की लड़कियों ने कबड्डी खेली और लोगों ने उनका उत्साहवर्धन किया।

सिंघु बॉर्डर पर अपने शरीर में जंजीर बांधकर और उसमें ताला लगाकर प्रदर्शन करने आए काबिल सिंह लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। पंजाब के फाजिलनगर से आंदोलन में पहुंचे काबिल सिंह ने बताया कि सरकार किसानों को इसी तरह जंजीर में बांधना चाहती है और ताला लगाकर चाबी अपने पास रखना चाहती है। काबिल ने तीनों कृषि कानूनों को समाप्त करने की मांग की।