अमेरिकी प्रतिबंध के मद्देनजर भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने मई के लिए ईरान को तेल का ऑर्डर देने से फिलहाल पैर पीछे खींच लिए हैं। इसका कारण अमेरिका प्रतिबंध से छूट की समय-सीमा आगे बढ़ेगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं होना है। मामले की जानकारी रखने वाले चार सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बीते साल नवंबर में ईरान परमाणु समझौते को रद्द कर उसके खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को दोबारा बहाल कर दिया था। वाशिंगटन ने हालांकि भारत सहित आठ देशों को छह महीने तक ईरानी तेल खरीदने की मंजूरी दी थी। छह महीनों की यह अवधि मई की शुरुआत में खत्म होने वाली है।

सूत्रों ने बताया कि भारत को उम्मीद है कि आगामी सात से 10 दिनों के भीतर यह साफ हो जाएगा कि प्रतिबंधों से छूट को आगे बढ़ाएगा या नहीं, साथ ही छूट की अवधि बढ़ाए जाने पर कितना तेल खरीदना है, इस पर भी तस्वीर साफ हो जाएगी। मुद्दे की गंभीरता के चलते पहचान जाहिर न करने की शर्त पर एक सूत्र ने बताया, ‘अमेरिका क्या सोचता है यह हमें नहीं पता। वह भारत को ईरान से तेल खरीदने की मंजूरी देगा या नहीं यह भी नहीं मालूम।’

भारतीय सूत्रों ने पिछले महीने कहा था कि अमेरिका द्वारा प्रतिबंध से मौजूदा छूट के तहत भारत 3,00,000 बीपीडी ईरानी तेल खरीद सकता है और नई दिल्ली इतना ही तेल ईरान से खरीदना चाहता है।

नवंबर के बाद केवल सरकारी कंपनियां – इंडियन ऑइल, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स ही ईरानी तेल खरीद रही थीं। सरकारी रिफाइनरी कंपनियों और केंद्रीय तेल मंत्रालय ने रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया।