तिहाड़ में हिंसा, कैदियों को नहीं करने दी वीडियो कॉलः पिंजरातोड़ की सदस्य पहुंची उच्च न्यायालय

नई दिल्ली, (hdnlive)। दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा से संबंध के आरोप में गिरफ्तार पिंजरा तोड़ समूह की एक महिला सदस्य ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में आरोप लगाया कि 16 जून को तिहाड़ जेल में ” बड़े पैमाने पर हिंसा” हुई और कैदियों को जेल के बाहर के किसी भी व्यक्ति से संपर्क करने पर प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन पर वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करने पर भी रोक लगा दी गई है। पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य नताशा नरवाल की ओर से पेश हुए वकील ने न्यायमूर्ति सी हरिशंकर के सामने यह अभिवेदन दिया है कि हिंसा हुई थी और जेल के कर्मियों ने कुछ कैदियों की कथित रूप से हड्डियां तोड़ दी हैं। वकील ने कहा कि जेल के कर्मियों ने नरवाल समेत कई कैदियों को धमकाया भी है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बुधवार सुबह हुई सुनवाई में दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता (अपराध) राहुल मेहरा ने जेल के बाहर के लोगों से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क नहीं करने देने के आरोप का कड़ाई से प्रतिरोध किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कारावास महानिदेशक की ओर से मिले निर्देशों के मुताबिक, ‘‘कनेक्टिविटी’’ का मसला था, जिसे दुरूस्त किया जा रहा है और इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंस हो नहीं पा रही है।

बहरहाल, नरवाल के वकील ने कहा कि जेल में जो व्यक्ति वीडियो कॉन्फ्रेंस का संचालन करता है, उसने उन्हें बताया कि जेल में हिंसा की वजह से लॉकडाउन है। इसके बाद, उच्च न्यायालय ने मेहरा से स्थिति रिपोर्ट दायर करने को कहा जो पहले के आदेश के मुताबिक 24 जून को दायर होनी थी और मामले को अगली सुनवाई के लिए 29 जून को सूचीबद्ध कर दिया। अदालत ने मेहरा से महिला की इस शिकायत पर गौर करने को भी कहा कि उन्हें परिवार से प्रतिदिन फोन पर पांच मिनट बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही है जिसकी नियमों के तहत कैदियों को अनुमति होती है। नरवाल जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा हैं। उन्होंने अपने वकील से प्रतिदिन बात करने और जेल में पुस्तकें आदि रखने की अनुमति के लिए उच्च न्यायालय का रूख किया है।

दिल्ली की जेलों में कोविड-19 महामारी के कारण कैदियों की वकीलों के साथ मुलाकात को स्थगित कर दिया गया है। पिंजरा तोड़ समूह 2015 में बना था। इसका मकसद छात्रावासों और किराये के आवासों में महिलाओं पर लगने वाली प्रतिबंधों को कम कराना है। नरवाल और समूह की दूसरी सदस्य देवांगना कालिथा को तिहाड़ जेल में रखा गया है। उन्हें दिल्ली पुलिस ने 23 मई को उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के आरोप में गिरफ्तार किया था। निचली अदालत ने उन्हें 24 मई को जमानत दे दी थी, लेकिन थोड़े वक्त बाद ही, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने उन्हें दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लिया था।