निर्भया केस के दोषियों को फांसी में हुई देरी के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सजा-ए-मौत के लिए 7 दिन की समयसीमा तय करने की मांग की है। सरकार चाहती है कि फांसी की सजा पाए दोषियों को 7 दिन के भीतर फंदे पर लटका दिया जाए। गृहमंत्रालय की याचिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि 2012 के निर्भया गैंगरेप-मर्डर केस में चार दोषियों को फांसी की सजा काफी दिनों से लंबित है। रिव्यू, क्यूरेटिव और दया याचिका में लंबा समय लगा है।

गृहमंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय से अपील की है कि रिव्यू पिटिशन खारिज होने के बाद क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल करने के लिए समयसीमा तय हो। सरकार ने कहा है, ‘यदि दोषी दया याचिका दायर करना चाहता है तो सक्षम कोर्ट द्वारा डेथ वॉरंट जारी किए जाने के 7 दिन के भीतर करने की बाध्यता हो।’

गृहमंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सभी अदालतों, राज्य सरकारों, जेल प्रशासन को निर्देशित किया जाए कि दया याचिका खारिज होने के बाद सात दिन के भीतर डेथ वॉरंट जारी किया जाए और इसके बाद सात दिन के भीतर उसे फांसी दे दी जाए, चाहे उसके साथी दोषियों के रिव्यू पिटिशन, क्यूरेटिव पिटिशन और दया याचिका किसी भी चरण में हो।’

सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी को निर्भया केस के दोषी की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उसने यह दावा करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के ऑर्डर को चुनौती दी थी कि वह अपराध के समय नाबालिग था। कोर्ट ने कहा था कि वह नई याचिका दायर करके मामले को लटका नहीं सकता।

दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में इस केस के चार दोषियों विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह, मुकेश कुमार सिंह और पवन के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी किया है। इसके मुताबिक इन्हें 1 फरवरी को फांसी दी जाएगी। पिटिशन लंबित होने की वजह से इनकी फांसी 22 जनवरी से टल गई और 1 फरवरी के लिए निर्धारित हुई।