भारत के घरेलू मसले में टिप्पणी को लेकर सरकार ने मलयेशिया को दो टूक जवाब दिया। मलयेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद के बयान को विदेश मंत्रालय ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। महातिर ने कहा था कि कुछ मुसलमानों को नागरिकता से वंचित रखने के लिए भारत ने नागरिकता कानून में संशोधन किया है।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि मलयेशिया को भारत के अंदरूनी मामलों पर, खास तौर से तथ्यों की समझ के बगैर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। मोहम्मद ने शुक्रवार को कहा था, ‘स्वयं को धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करने वाले भारत को देख कर मुझे दुख होता है कि अब वह कुछ मुसलमानों को नागरिकता से वंचित करने के लिए कदम उठा रहा है।’

इस पर विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘मीडिया की खबर के मुताबिक मलयेशिया के प्रधानमंत्री ने एक बार फिर भारत के आंतरिक मामले पर टिप्पणी की है। CAA उन लोगों को नागरिकता देने की प्रक्रिया को तेज करता है जो धार्मिक कारणों से सताए जाने की वजह से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से देश में आए हैं।’

मंत्रालय ने कहा, ‘इस कानून से किसी भी भारतीय नागरिक की स्थिति प्रभावित नहीं होती या किसी भी भारतीय या धर्मावलंबी नागरिकता से वंचित नहीं होता। इस प्रकार मलेशियाई प्रधानमंत्री की टिप्पणी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।’