जैसे-जैसे दिल्ली चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे दिल्ली का चुनावी मुकाबला रोचक होता जा रहा है। इस दंगल में बीएसपी सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार कर ताल ठोकने के लिए तैयार दिख रही है। इतना ही नहीं, दिल्ली में केजरीवाल और आप के दलित व एससी वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने चुनावी रणनीति से लेकर प्रचार की कमान तक खुद अपने हाथ में ले ली है।

हालांकि 2015 में हुए असेंबली चुनाव में बीएसपी के 70 उम्मीवारों में से उसके 67 उम्मीदवारों ने अपनी जमानत जब्त कराई थी, लेकिन बीएसपी ने हार नहीं मानी है। पिछली असेंबली में उसे कुल 1.3 फीसदी वोट मिले थे। यूं तो बीएसपी पिछले लंबे अर्से से दिल्ली के चुनाव में अपनी सक्रिय भूमिका निभाती रही है, लेकिन उसे आखिरी जीत 2008 के असेंबली चुनाव में मिली थी, जब उसे दो सीटें मिली थीं। सूत्रों के मुताबिक, मायावती दिल्ली चुनावों को लेकर तीन रैलियां करेंगी। उनकी एक रैली आगामी 3 फरवरी को दिल्ली के तालकटोरा में होगी। वहीं बाकी रैलियां साउथ दिल्ली के बदरपुर और बाहरी दिल्ली में हो सकती है। उल्लेखनीय है कि यह दोनों इलाके किसी समय में बीएसपी के मजबूत इलाके रहे हैं।

वहीं दिल्ली में अपनी पार्टी के प्रचार कामों में मायावती ने अपने अलावा अपनी पार्टी के सभी सांसदों को लगा दिया है, जिसमें लोकसभा में बीएसपी के 10 सांसद व राज्यसभा के चार सांसद शामिल हैं। इसके तहत बीएसपी ‘डोर डु डोर’ कैंपेन करने के साथ ही छोटी-छोटी सभाएं करेगी। यूं तो बीएसपी दिल्ली के तमाम दलित समुदाय पर निगाहें जमीए हुए है, लेकिन उसका असली टारगेट की दिल्ली एक दर्जन रिजर्व सीटें हैं।