नई दिल्‍ली. जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय (JNU) परिसर में 5 जनवरी और उससे पहले हुई हिंसा को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. सूचना का अधिकार कानून (RTI) के तहत दाखिल अर्जी के जवाब में नई बातें सामने आई हैं. आरटीआई के तहत दिए गए आवेदन में जवाब में JNU ने बताया कि विश्‍वविद्यालय परिसर में स्थित डाटा सर्वर रूम में किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं हुई. इसके अलावा CCTV कैमरों और बायोमीट्रिक सीस्‍टम को भी क्षतिग्रस्‍त नहीं किया गया था. मालूम हो कि JNU प्रशासन ने दावा किया था कि छात्रों ने 3 जनवरी को डाटा सर्वर रूम, CCTV कैमरे और बायोमीट्रिक सिस्‍टम को तबाह और बर्बाद कर दिया.

रिप्‍लेस तक नहीं हुए कंप्‍यूटर

सौरव दास की अर्जी पर JNU द्वारा दिए गए जवाब में और भी चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. प्‍वाइंट नंबर दो में कहा गया है कि सर्वर रूम में रखे गए सभी सर्वर रूम को सिर्फ रिबूट करके सुधार लिया गया. न तो इन्‍हें कोई नुकसान पहुंचा था और न ही इन्‍हें रिप्‍लेस ही किया गया. इसके अलावा RTI जवाब के प्‍वाइंट नंबर 4 और 10 में स्‍पष्‍ट रूप से कहा गया है कि न तो CCTV कैमरों और न ही डाटा सर्वर रूम में तोड़फोड़ की गई.

ये बातें भी आईं सामने

आरटीआई कार्यकर्ता सौरव दास ने बताया कि उन्‍होंने 8 जनवरी को अर्जी देकर जवाब मांगा था. दास ने CNN News18 को बताया कि उन्‍होंने जेएनयू छात्रों की जिंदगी और उनकी स्‍वतंत्रता के खतरे में होने का दावा किया था. बकौल दास, उन्‍हें 24 घंटे में ही आरटीआई अर्जी का जवाब दे दिया गया था. इसके मुताबिक, जेएनयू प्रशासन ने 3 और 4 जनवरी को हिंसा की घटनाएं होने की बात कही है. सौरव दास ने बताया कि दिल्‍ली पुलिस की FIR के मुताबिक, तोड़फोड़ की घटनाएं 1 जनवरी को हुई थीं.