चमोली ग्लेशियर हादसा :रात भर चला रेस्क्यू , 150 से ज्यादा अब भी लापता

उत्तराखंड (hdnlive) : उत्तराखंड के चमोली में रविवावर को रौठी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर गिर गया, इससे ऋषि गंगा नदी में विकराल बाढ़ आ गई और भारी तबाही मची। इस सैलाब में कई लोग बह गए, जिनमें से 10 के शव बरामद कर लिए गए हैं और 152 लोग अभी भी लापता हैं। इस आपदा से ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट और एनटीपीसी प्रोजेक्ट को भारी नुकसान हुआ है। इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे करीब 100 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

हालात को देखते हुए सेना के 100, आईटीबीपी के 315, एनडीआरएफ के 250 जवानों को भी राहत और बचाव कार्य में लगाया गया। इधर, गाजियाबाद से भी एनडीआरएफ के 100 जवान, एयरफोर्स के विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंच गए। जिन्हें सोमवार को चमोली रवाना किया जाएगा।

एनडीआरएफ के साठ जवानों की एक टुकड़ी पहले ही सड़क मार्ग से चमोली रवाना हो चुकी है। एसडीआरएफ के मुताबिक ग्लेशियर टूटने की घटना रविवार सुबह 10: 50 बजे जोशीमठ से करीब 15 किमी की दूरी पर स्थित रेणी गांव के करीब हुई। ग्लेशियर के टूटने से ऋषिगंगा प्रोजेक्ट क्षतिग्रस्त हो गया। जिस पर एसडीआरएफ की पांच टीमों को तत्काल जोशीमठ रवाना किया गया। साथ ही श्रीनगर, ऋषिकेश, जोशीमठ में टीमों को अलर्ट स्थिति में रखा गया। हादसे की वजह से रैणी गांव के पास बीआरओ का लगभग 90 मीटर लंबा पुल भी आपदा में बह गया।

भारतीय वायुसेना बताया है कि हादसे में तपोवन बांध पूरी तरह बह गया है

chamoli dam

भारतीय वायुसेना ने हवाई निरीक्षण के बाद दी अपनी शुरुआती रिपोर्ट में बताया है कि हादसे में तपोवन बांध पूरी तरह बह गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मलारी वैली और तपोवन के एंट्रेंस पर दो पुल भी हादसे में बह गए हैं। हालांकि, जोशीमठ से तपोवन के बीच की मुख्य सड़क बच गई है।

ऋषि गंगा शीर्ष भाग से ही ढलान पर बहती है। जिससे नदी का पानी तेज बहाव से निचले क्षेत्र में पहुंच गया और सबकुछ तबाह करके चला गया। रैनी गांव के उदय सिंह ने बताया कि सुबह साढ़े नौ बजे ऊपरी हिमालय क्षेत्र से सफेद धुएं के साथ नदी मलबे के साथ बहकर आती दिखने से लोगों में खौफ छा गया। नदी के तेज बहाव से डरावनी आवाजें निकल रही थीं।

बैराज साइड पर काम कर रहे थे मजदूर

लोग नदी का पानी को देखकर अपने घरों से बाहर निकल गए। धौली गंगा पर निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना के निर्माण में मजदूर काम कर रहे थे लेकिन सुबह दस बजे जैसे ही धौली गांव का जल स्तर बढ़ने लगा लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग बैराज साइड काम कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों में चले जाने के लिए आवाज लगा रहे थे, लेकिन नदी की तेज गर्जना से मजदूरों को कुछ सुनाई नहीं दिया।

मलबे में दफन हो गया टनल

देखते ही देखते परियोजना का बैराज और टनल मलबे में दफन हो गया। रैनी गांव के लोगों का कहना है कि नंदा देवी पर्वत की तलहटी से ग्लेशियर के टूटने से यह तबाही मची है। ऐसी भयंकर जलप्रलय कभी नहीं देखा थी।

सैलाब सबकुछ बहा ले गया

चमोली जिले में धौलीगंगा के किनारे ऋषिगंगा पावर प्रॉजेक्ट पूरी तरह बर्बाद हो गया। अब यहां चारों ओर मलबा ही नजर आ रहा है। ऋषिगंगा व धौलीगंगा के आसपास रहने वालों का सम्पर्क शेष दुनिया से टूट गया है। यह मंजर देख लोगों को केदारनाथ की तबाही याद आ गई।

प्रॉजेक्ट साइट्स पर फंसे ज्यादातर लोग तेलुगू

चमोली जिले में ऋषिगंगा और एनटीपीसी की प्रॉजेक्ट साइट पर फंसे लोगों को निकालने के लिए आईटीबीपी और एसआरडीएफ ने अभियान चलाया। बताते हैं, प्रॉजेक्ट साइट पर ज्यादातर फंसे लोग आंध्र प्रदेश के तेलुगु समुदाय से हैं। देर शाम तक वहां से 16 लोगों को बचाया जा चुका था। एयरफोर्स ने एनडीआरएफ की 5 टीमें और नेवी के गोताखोर एयरलिफ्ट किए हैं। मदद के लिए चिनूक हेलिकॉप्टर और सेना भी तैयार है।

पहले भी आईं आपदाएं-

2013 : केदारनाथ में बादल फटने से तबाही, 5,700 लोगों की मौत

1999 : चमोली जिले में 6.8 तीव्रता का भूकंप, 100 लोगों की जान गई

1998 : पिथौरागढ़ में भूस्खलन से गांव दफन, करीब 255 लोग मारे गए

1991 : उत्तरकाशी में 6.8 तीव्रता का भूकंप। 768 लोगों की मौत हुई