विदेशों से आने वाली सहायता दिल्ली सरकार को नहीं देने पर कोर्ट ने उठाए सवाल

(hdnlive) विदेशों से मिल रही सहायता सिर्फ केंद्र सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों व संस्थानों में भेजे जाने पर हाईकोर्ट ने बुधवार को सवाल उठाया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि यह सहायता दिल्ली के लिए है तो उसे दिल्ली सरकार को आवंटित किया जाना चाहिए।

जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने केंद्र सरकार से विदेशी सहायता आवंटन के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। पीठ ने इसमें केंद्र को यह बताने के लिए कहा है कि विदेशों से मिली सहायता में से कितनी और किन संस्थानों में वितरित किया गया। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि जब आप सहायता में मिली दवाइयां और चिकित्सा उपकरण दिल्ली को आवंटित करते हैं तो आपको खुद से संचालित संस्थानों और अस्पतालों से परे हटकर देखना चाहिए।

कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि सहायता वहां भेजी जानी चाहिए, जहां इसकी सबसे अधिक जरूरत है। कोर्ट ने कहा है कि विदेशों से सहायता जिन मरीजों की सेवा व लाभ के लिए आई है, उसका लाभ उन्हें मिलना चाहिए। साथ ही हिदायत दी कि यदि सहायता के आवंटन में सुधार नहीं हुआ तो हम आदेश पारित करना होगा। हालांकि केंद्र सरकार ने कहा कि सहायता का वितरण लक्षित और न्यायसंगत तरीके से किया जा रहा है। सरकार ने पहा कि सहयता का आवंटन केंद्रीकृत था, लेकिन अब इसे राज्यों को भेजा जा रहा जो यह तय करते हैं कि वे किन संस्थानों को सहायता देनी हैं। इस पर पीठ ने कहा कि अब तक के जानकारी के अनुसार मंगलवार को राजधानी के लिए सहायता वितरण के लिए दिल्ली सरकार को नहीं दी गई।

दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने आरोप लगाया कि विदेशों से मिलने सहायात को केंद्र दिल्ली में खुद से संचालित अस्पतालों व संस्थानों को दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सहायता दिल्ली सरकार के अस्पतालों को नहीं दी जा रही है। इस पर न्याय मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता राजेशखर राव ने भी पीठ को बताया कि रिकॉर्ड पर मिली कुछ दस्तावेजों के अनुसार सहायता दिल्ली में संस्थानों के लिए जा रही थी, दिल्ली सरकार को नहीं दी जा रही है।