फोटो पत्रकार दानिश की हत्या, तालिबान भारत के लिए चिंता का विषय

भारतीय फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी (photojournalist danish siddiqui) अफगानिस्तान में अफगान सैनिकों और तालिबान के बीच लड़ाई को कवर करते हुए मारे गए। पिछले कई दिनों से वो कंधार में जो हालात हैं उसको कवर कर रहे थे। दानिश अफगानिस्तान के स्पिन बोल्दाक जिले में संघर्ष के दौरान मारे गए। दानिश की मौत की खबर सुनकर भारत में लोग दुखी हैं और तालिबान का दर्द मिलना भी शुरू हो गया है।

तालिबान भारत के लिए पैदा कर सकता है मुश्किल

तालिबान भारत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। तालिबान यह चाहता है कि अफगानिस्तान में 2001 से पहले जैसे उसने शासन किया उसी प्रकार उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता और पहचान मिले। अफगानिस्तान के लगभग 85 फीसदी हिस्से पर वो अपना कब्जा जमा चुका है और वह अफगानिस्तान की चुनी हुई सरकार और उसके सैनिकों को खत्म करने पर अमादा है। तालिबान को इस बात का पूरा यकीन हो चला है कि अब उसके रास्ते में कोई आने वाला नहीं है। तालिबान को लेकर भारत की चिंता जायज है और अफगानिस्तान को लेकर अपना पक्ष भी रख दिया है।

भारतीय नागिरकों के साथ ही निवेश की भी चिंता

अफगानिस्तान में भारतीय नागरिकों की चिंता के साथ ही साथ कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को लेकर भी भारत चिंतित है। तालिबान मध्य एशिया के देशों और ईरान के सीमा के शहरों को अपने कब्जे में कर रहा है। भारत के सामने एक अलग ही चुनौती सामने आने वाली है। चाबहार बंदरगाह, तापी गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।

वहीं भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा है। अफगानिस्तान में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भारत तीन अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुका है। भारत ने अफगानिस्तान में संसद भवन का निर्माण किया है, वहीं एक बड़ा बांध भी बनाया है। भारत अपने निवेश को लेकर भी चिंतित है।

पाकिस्तान और चीन के कदम पर भी नजर

भारत की चिंता पाकिस्तान और चीन को लेकर भी है। जम्मू कश्मीर की अफगानिस्तान से भी सीमा लगती है। वहीं गिलगित बाल्टिस्तान की भू सामरिक स्थिति पाकिस्तान और भारत दोनों को लिए महत्वपूर्ण है दूसरी ओर वाखन गलियारा में चीन रूचि ले रहा है। तालिबान के बढ़ते दखल के बाद इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं चीन पाकिस्तान और तालिबान का गठजोड़ न बन जाए। दिसंबर 1999 में कंधार में जो कुछ हुआ उसे पूरी दुनिया ने देखा। भारतीय विमान के अपहरण की कहानी आज भी भारत के लोग भूले नहीं हैं।