Sawan Kavad Yatra 2022: जानिए किन कठिन नियमो का पालन करना परता है कावड़ यात्रियों को

नई दिल्ली (hdnlive) : भगवान शिव (Lord shiv) की कृपा पाने के लिए कावड़ यात्रा (Kavad Yatra 2022) भी एक श्रेष्ठ माध्यम है। कावड़ में एक लकड़ी के दोनों सिरों पर रस्सी के माध्यम से मटकी या कोई बर्तन बंधा रहता हैं, जिसमें पानी भरकर भक्तजन कई किलोमीटर की पैदल यात्रा कर शिव मंदिर ले जाते हैं और अभिषेक करते हैं। इस यात्रा के दौरान कई कठिन नियमों (Kavad travel rules) का पालन करना पड़ता है।

नशा करने पर पाबंदी, मांस या अंडे खाने पर भी पाबंदी

kavad yatri

जो भी व्यक्ति कांवड़ यात्रा में शामिल होता है उसे किसी भी तरह का नशा करने का मनाही होती है। यात्रा के दौरान मांस या अंडे खाने पर भी पाबंदी रहती है। कुछ लोग तो यात्रा के दौरान लहसुन-प्याज भी नहीं खाते क्योंकि इन्हें तामसिक माना जाता है यानी इन्हें खाने में मन में बुरे विचार आने की संभावना रहती है।

बिना स्नान किए कावड़ यात्री कावड़ को नहीं छूते

कावड़ यात्रा के दौरान शारीरिक शुद्धता का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। बिना स्नान किए कावड़ यात्री कावड़ को नहीं छूते। यदि मार्ग में किसी कारणवश कावड़ कंधे से उतारनी पड़े तो बिना शुद्ध हुए दोबारा कावड़ को हाथ नहीं लगाते। कावड़ यात्रा के दौरान तेल, साबुन, कंघी करने व अन्य श्रृंगार सामग्री का उपयोग भी नहीं किया जाता।

चारपाई पर बैठना एवं किसी भी वाहन पर चढ़ना भी मना

कावड़ यात्रियों के लिए चारपाई पर बैठना एवं किसी भी वाहन पर चढ़ना भी मना है। कावड़ यात्रियों की पूरी यात्रा पैदल ही तय करनी पड़ती है। कुछ कावड़ यात्री यात्रा के दौरान जूते-चप्पल भी नहीं पहनते। यात्रा के दौरान चमड़े से बनी चीजों जैसे बेल्ट, पर्स आदि का स्पर्श करना भी मना होता है।

कावड़ के साथ ही रहना होता है

कावड़ यात्री उत्साह बनाए रखने के लिए रास्ते भर बोल बम और जय-जय शिव शंकर का उद्घोष करते हुए चलते हैं। इससे उनका ध्यान दूसरी ओर नहीं भटकता और शिवजी के प्रति आस्था बनी रहती है। यात्रा के दौरान कावड़िए कावड़ की रखकर इधर-उधर नहीं जा सकते। उन्हें कावड़ के साथ ही रहना होता है।